Package of Practices for Moong (Green Gram) Cultivation
मूंग की भरपूर पैदावार लेने के लिए आवश्यक सुझाव
मूंग, जिसे हरी मूंग या ग्रीन ग्राम भी कहा जाता है, भारत की एक प्रमुख दलहनी फसल है। इसे ग्रीष्म एवं खरीफ दोनों मौसमों में उगाया जा सकता है। यह फसल प्रोटीन से भरपूर होती है तथा राइजोबियम जीवाणुओं द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
1. भूमि का चयन
- मिट्टी: रेतीली से दोमट
- पी.एच. मान: 6.5 – 7.0
- ध्यान दें: जलभराव वाली भूमि उपयुक्त नहीं
2. बिजाई का समय
(क) ग्रीष्मकालीन मूंग
- मध्य प्रदेश, झारखण्ड, बिहार, राजस्थान: मार्च
- उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र: मार्च से अप्रैल प्रारम्भ
(ख) खरीफ (मानसून) मूंग
- अधिकांश क्षेत्र: जून का अंतिम सप्ताह से जुलाई का प्रथम सप्ताह
- कुछ क्षेत्रों में: 15 मई से जुलाई तक
3. मूंग की किस्में
- MH-421
- MH-1142
- माधव
4. बीज दर
- ग्रीष्मकालीन: 8–10 किग्रा प्रति एकड़
- खरीफ: 5–6 किग्रा प्रति एकड़
5. कतार व पौध दूरी
- ग्रीष्मकालीन: कतार से कतार दूरी 30 सेमी
- खरीफ: कतार से कतार दूरी 45 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी: 10–15 सेमी
6. उर्वरक प्रबंधन (प्रति एकड़)
- यूरिया: 18 किग्रा (बिजाई के समय)
- एस.एस.पी.: 100 किग्रा या डी.ए.पी.: 35 किग्रा
- सल्फर (दानेदार): 8 किग्रा
नोट: बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने पर नाइट्रोजन की आवश्यकता और कम हो जाती है।
7. खरपतवार नियंत्रण
- पेंडीमेथालिन 30 ई.सी. (स्टोम्प): 700 मि.ली./एकड़ (बिजाई के तुरंत बाद)
- एक निराई-गुड़ाई: बिजाई के 25–30 दिन बाद
8. सिंचाई प्रबंधन
- ग्रीष्मकालीन: पहली सिंचाई 20 दिन बाद, तत्पश्चात 2–3 सिंचाइयाँ 15 दिन के अंतराल पर
- खरीफ: वर्षा की उपलब्धता के अनुसार
9. प्रमुख कीट एवं नियंत्रण
- बालों वाली सुंडी (कातरा): मोनोक्रोटोफॉस 1 मि.ली./लीटर या क्विनालफॉस 2 मि.ली./लीटर पानी
- हरा तेला व सफेद मक्खी: रोगोर / टैफगोर 1 मि.ली./लीटर पानी
10. प्रमुख रोग एवं नियंत्रण
- पीला मोजैक रोग: रोगोर / टैफगोर 1 मि.ली./लीटर पानी (20–25 दिन बाद स्प्रे)
- पत्तों का धब्बा एवं बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट: मैंकोजेब (इंडोफिल M-45) 600 ग्राम/एकड़